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कटघोरा

कटघोरा को जिला बनाने अधिवक्ता संघ ने एक बार फिर खोला मोर्चा: झमाझम बारिश में  निकाली कार रैली

कटघोरा।कटघोरा को पूर्ण जिला घोषित करने की दशकों पुरानी मांग को लेकर अधिवक्ता संघ ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश के बीच, अधिवक्ताओं ने कसनिया (अहिरन नदी) से एसडीएम कार्यालय तक एक विशाल कार रैली निकाली। पूर्व निर्धारित योजना के तहत पहले बाइक रैली होनी थी, लेकिन खराब मौसम के कारण वकीलों ने कारों में सवार होकर गगनभेदी नारों के साथ सफर तय किया। रैली के समापन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम एसडीएम को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में जिला गठन के ठोस प्रशासनिक व औद्योगिक आधार तथा कटघोरा को जिला बनाने के पक्ष में कई मजबूत ऐतिहासिक, प्रशासनिक और भौगोलिक तर्क प्रस्तुत किए हैं।

कटघोरा तहसील की स्थापना ब्रिटिश काल (1912) में हुई थी। वर्तमान में यहाँ पहले से ही ADM, ASP, DFO और विद्युत विभाग के DO कार्यालय संचालित हैं। साथ ही अपर सत्र न्यायालय व कुटुंब न्यायालय जैसे न्यायिक पद भी मौजूद हैं इस क्षेत्र में SECL की 10-12 कोयला खदानों सहित NTPC, हसदेव व बांगो थर्मल पावर जैसे देश के बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान हैं। इसके अंतर्गत पोड़ी उपरोड़ा, पाली, दीपका और हरदीबाजार जैसे बड़े क्षेत्र आते हैं, जिससे यहाँ जिला स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है। जिला मुख्यालय न होने से स्थानीय लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी कोरबा जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे का नुकसान होता है।

​अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेश पाल, सचिव यदुनंदन जायसवाल व अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि यह मांग पिछले 30 वर्षों से की जा रही है और 30 जनवरी 2026 से यहाँ क्रमिक धरना प्रदर्शन भी जारी है। वकीलों और स्थानीय नागरिकों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस बार भी कटघोरा की उपेक्षा की, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।