राज्य सरकार द्वारा पेश बजट किसानों के लिए निराशाजनक : लाल बहादुर कोर्राम

कटघोरा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पेश किए गए राज्य बजट को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। मूल निवासी किसान संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष लाल बहादुर कोर्राम ने बजट को “निराशाजनक” बताते हुए राज्य सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया है।
सोमवार को राज्य के वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और औद्योगिक विकास सहित कई प्रमुख क्षेत्रों के लिए प्रावधान किए गए हैं। किसान संघ ने कृषि संबंधी घोषणाओं को अपर्याप्त बताया है।
लाल बहादुर कोर्राम ने कहा कि प्रदेश के किसानों के लिए सिर्फ 300 करोड़ रुपये तक के ब्याजमुक्त ऋण का प्रावधान और कृषि महाविद्यालय के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट इसी से पता चलता है यह बजट किसानों को केवल “झुनझुना” पकड़ाने जैसा है। उनका आरोप है कि वास्तविक जरूरतों की तुलना में यह राशि बहुत कम है और इससे किसानों की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि धान खरीदी में अव्यवस्था के कारण हाल ही में पांच किसानों द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने की घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है। उनका कहना है कि जब तक धान खरीदी व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक किसानों की आर्थिक स्थिति नहीं सुधर सकती।
किसान संघ ने बजट में औद्योगिक क्षेत्र के लिए 750 करोड़ रुपये के अनुदान ऋण प्रावधान पर भी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि जहां उद्योगों को प्रोत्साहन के लिए बड़ी राशि दी जा रही है, वहीं किसानों को अपेक्षाकृत कम सहायता दी जा रही है। इसे उन्होंने “कृषि प्रधान राज्य में किसानों के साथ अन्याय” बताया।
खदान विस्तार और भूमि अधिग्रहण पर नाराज़गी
लाल बहादुर कोर्राम ने आरोप लगाया कि प्रदेश में किसानों और आदिवासियों की भूमि निजी कंपनियों को खदान खोलने के लिए दी जा रही है। उन्होंने विशेष रूप घुंचापुर में प्रस्तावित लिथियम खदान में सैकड़ो एकड़ भूमि प्रभावित हो रही है और साथ ही अदानी ग्रुप और रूंगटा ग्रुप का उल्लेख करते हुए कहा कि ठेकेदारों के माध्यम से खदान विस्तार की तैयारी की जा रही है। कोरबा जिले के पोंडी उपरोड़ा क्षेत्र में सरमा और रानी अटारी के आसपास लगभग 9 ग्राम पंचायतों को खदान परियोजना के लिए प्रस्तावित किए जाने का भी उन्होंने जिक्र किया। उनका कहना है कि यहां के आदिवासी किसान लंबे समय से आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है।
मूल निवासी किसान संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए जाएं। साथ ही खदान विस्तार और भूमि अधिग्रहण के मामलों में स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासियों की सहमति को प्राथमिकता दी जाए।
