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कटघोरा

कटघोरा का साप्ताहिक बाजार, नेतागिरी का शिकार

कटघोरा ( गूगली न्यूज  )। कटघोरा के प्रत्येक  रविवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार  राजनीति का शिकार हो चुका है  जिसे लेकर  एक ताजा अपडेट आया है कि अंचल के आदिवासी सब्जी विक्रेताओं ने  कटघोरा बाजार में उनके साथ हो रहे भेदभाव और दुर्व्यवहार को लेकर घोर आपत्ति जताया है ।आसपास ग्राम के सैकड़ों आदिवासी किसान एवं सब्जी उत्पादक कटघोरा के तथाकथित नेता और नगरपालिका परिषद पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए पाली तानाखार विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम को संबोधित एक संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र लिखकर शीघ्र निराकरण की मांग किए हैं । आवेदन में यह भी लिखा गया है कि यदि उन्हें कटघोरा बाजार में उचित स्थान देकर बैठने नहीं दिया जाएगा तो आसपास के ग्रामीण  साप्ताहिक बाजार पौड़ी, पचरा, तुमान, जटगा, कोरबी, गुरसियां , बिंझरा, तानाखार इत्यादि में  कटघोरा के व्यापारियों का कड़ा विरोध किया जाएगा और  उन के हर प्रकार के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

ग्रामीण आदिवासी सब्जी विक्रेताओं के साथ बाजार में भेदभाव का आरोप

सब्जी उत्पादकों के साथ कटघोरा साप्ताहिक बाजार में नगरपालिका कर्मचारियों एवं कुछ तथाकथित जनप्रतिनिधियों  के द्वारा जिस  तरह से दुर्व्यवहार एवं भेदभाव  किया जाता है उससे आसपास ग्रामीण क्षेत्र के सब्जी उत्पादकों में रोष व्याप्त है। पाली तानाखार विधायक तुलेश्वर हीरासिंग मरकाम को  लिखे पत्र  में यह भी उल्लेख है कि हम आदिवासी  लोग अपने बाड़ी और खेतों में सब्जी उत्पादन कर अपना जीविकोपार्जन करते आ रहे हैं और हमारा सब्जी खपाने का मुख्य बाजार कटघोरा रहा है परन्तु कुछ दिनों से कटघोरा साप्ताहिक बाजार में हमे बैठने नहीं दिया जा रहा है इधर उधर भगा दिया जाता है जिससे हमें विक्रय के लिए ले गए ताजी सब्जियों को बिचौलियों को औने पौने दाम में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है या फिर 20 किमी दूर दर्री , जमनीपाली साप्ताहिक बाजार जाना पड़ता है जिससे हमें अनावश्यक आर्थिक व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।गौरतलब हो कि कटघोरा का साप्ताहिक बाजार काफी पुराना है और आसपास के ग्रामीण अंचलों के लिए फुटकर सब्जी विक्रेताओं का प्रमुख बाजार के रूप में जाना जाता है।

साप्ताहिक बाजार सिमट जाने से सब्जी की बिक्री आधी और किसानों की आय कम

सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि दैनिक और साप्ताहिक बाजार सिमट जाने से सब्जी की बिक्री आधी हो गई है जिससे कटघोरा में सब्जी बेचकर गुजारा करना मुश्किल हो गया है। एक तो सब्जी मार्केट छोटा और ऊपर से मुख्य मार्ग से अंदर जहां बाइक भी नहीं जा सकता चारपहिया जाने का तो सवाल ही नहीं उठता ,ऐसे में कौन सब्जी खरीददार अपनी जान जोखिम में डालकर  बाजार अंदर घुसना चाहेगा ? क्योंकि आए दिन बाजार अंदर धक्का मुक्की, चोरी, छेड़खानी , लड़ाई झगड़ा आम बात हो गई है दूसरी ओर मुख्य सड़क पर बाइक, कार वालो की बेतरतीब पार्किंग से सड़क दुर्घटना और जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है।

कटघोरा का साप्ताहिक बाजार सब्जी उत्पाद खपाने का प्रमुख बाजार

कटघोरा नगर पर आश्रित ग्रामीण अंचल के आदिवासी किसानों ने पत्र में यह भी लिखा है कि कटघोरा का साप्ताहिक बाजार उनके कृषि व सब्जी उत्पाद खपाने का प्रमुख बाजार रहा है।   सैकड़ों आदिवासी परिवार का जीविकोपार्जन हर रोज कृषि उत्पाद व सब्जियां खपाकर चलता हैं  परन्तु कटघोरा बाजार में भेदभाव होने से किसानों को अपना सामान बेचने के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता जिससे कुछ महीनों से बिचौलियों को काफी कम दाम में सब्जी बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीण अंचल के सब्जी विक्रेताओं को  बैठने की जगह कटघोरा में न तो दैनिक बाजार में मिल पाता और नहीं साप्ताहिक बाजार में । इधर उधर बैठने पर दुर्व्यवहार करके भगा दिया जाता है। पुराने बाजार में जो शेडयुक्त है उसमें पूर्व से सब्जी विक्रेता कब्जा जमा के बैठे हैं और दूसरी ओर यह जगह इतना छोटा है कि 50- 60 दुकानदारों से भर जाता है। वर्तमान समय से पूर्व  कटघोरा साप्ताहिक बाजार में हजारों  चलित दुकानदार विभिन्न समान लेकर आते थे और खरीददारों की संख्या 5000 से 10000 के आसपास होता था ।

नगरीय प्रशासन की हठधर्मिता  और कुछ प्रभावशाली नेताओं की दखलंदाजी से  ये विशाल साप्ताहिक बाजार सिमट कर रह गया है जिससे कटघोरा वासी ताजी सब्जियों के लिए तरस रहे है वहीं देहाती सब्जी विक्रेताओं को उनकी सब्जियों का सही दाम नहीं मिल पाने से किसान जिनका जीवन सब्जियों पर निर्भर है काफी परेशान हैं । कटघोरा का विशाल सब्जी मार्केट जगह के अभाव में अपना अस्तित्व खोते जा रहा है । कटघोरा  का साप्ताहिक बाजार नगर एवं आसपास के क्षेत्र के लिए सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर कर आया था। बाजार मुहल्ले से लेकर गायत्री धर्मशाला तक और इधर शहीद वीरनारायण चौक तक लगभग 500 मीटर तक फैला रहता था।  सरगुजा, कोरिया एवं बिलासपुर जिले तक के व्यापारी सब्जी एवं अन्य खाद्य पदार्थ, खिलौने ,कपड़े बेचने आते थे।कटघोरा का साप्ताहिक बाजार जिले का सबसे बड़ा साप्ताहिक बाजार के रूप में स्थापित हो चुका था। नए नगरपालिका गठन के बाद नवनिर्वाचित पार्षदों एवं बाजार मुहल्ले के व्यापारियों की मोनोपल्ली के आगे इस बाजार का अस्तित्व सिमटते जा रहा है । सरगुजा जिले से बहुतायत मात्रा में  आते रहे सब्जी, टमाटर, मूंगफली, अदरक, लहसुन ,आलू एवं प्याज की आवक जगह के अभाव में पूर्ण रूप से बंद हो चुका है । ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली ताजी सब्जियां का आना बंद हो चुका है ।

वर्तमान में बाजार मोहल्ला  जो काफी पुराना है पहले ग्राम पंचायत और नगर पंचायत के हिसाब से पर्याप्त था किंतु वर्तमान में यह स्थल काफी छोटा और सकरा है । यह स्थल चंद व्यापारियों के पसरा से भर जाता है , अब यहां न तो कपड़ा व्यापारियों को जगह मिल पाता न जूता चप्पल, न खिलौने और न ही किसी अन्य चीज बेचने वाले व्यापारियों को जगह मिल पाती । चंद मंडी से खरीदे सब्जी विक्रेताओं से ही बाजार भरा रहता है।

कटघोरा की बढ़ती जनसंख्या एवं नगर हित के मद्देनजर दैनिक सब्जी मार्केट एवं साप्ताहिक बाजार के लिए अन्यत्र स्थल चयन की आवश्यकता है।