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कटघोरा

नवगठित नगरपालिका परिषद की हठधर्मिता के आगे दम तोड़ता  कटघोरा का साप्ताहिक और दैनिक बाजार

ताजी सब्जी खाने तरस जा रहे कटघोरा के लोग

कटघोरा ( गूगली न्यूज सी जी )। कटघोरा का दैनिक और साप्ताहिक बाजार ताजी और सस्ती सब्जी मिलने का केंद्र माना जाता था। रोज नई और ताजी सब्जियां देहात से लाकर स्वयं किसान बेचकर लाभान्वित होते थे परंतु आज कोई भी देहात से सब्जी भाजी लेकर कटघोरा नहीं आते और जो आते है वो बिचौलियों को काफी कम दाम में बेचने को मजबूर हो जाते है क्योंकि उनके लिए बैठने की जगह कटघोरा में न तो दैनिक बाजार में मिल पाता और नहीं साप्ताहिक बाजार में। पुराने बाजार में जो शेडयुक्त है उसमें पूर्व से सब्जी विक्रेता कब्जा जमा के बैठे हैं और दूसरी ओर यह जगह इतना छोटा है कि 50- 60 दुकानदारों से भर जाता है। वर्तमान समय से पूर्व  कटघोरा साप्ताहिक बाजार में हजारों  चलित दुकानदार विभिन्न समान लेकर आते थे और खरीददारों की संख्या 5000 से 10000 के आसपास होता था । नगरीय प्रशासन की हठधर्मिता  और कुछ प्रभावशाली नेताओं की दखलंदाजी से  ये विशाल साप्ताहिक बाजार सिमट कर रह गया है जिससे कटघोरा वासी ताजी सब्जियों के लिए तरस रही है वहीं देहाती सब्जी विक्रेताओं को उनकी सब्जियों का सही दाम नहीं मिल पाने से किसान जिनका जीवन सब्जियों पर निर्भर है काफी परेशान हैं । कटघोरा का विशाल सब्जी मार्केट जगह के अभाव में अपना अस्तित्व खोते जा रहा है । कटघोरा  का साप्ताहिक बाजार नगर एवं आसपास के क्षेत्र के लिए सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर कर आया था। बाजार मुहल्ले से लेकर गायत्री धर्मशाला तक और इधर शहीद वीरनारायण चौक तक लगभग 500 मीटर तक फैला रहता था।  सरगुजा, कोरिया एवं बिलासपुर जिले तक के व्यापारी सब्जी एवं अन्य खाद्य पदार्थ, खिलौने ,कपड़े बेचने आते थे।कटघोरा का साप्ताहिक बाजार जिले का सबसे बड़ा साप्ताहिक बाजार के रूप में स्थापित हो चुका था। नए नगरपालिका गठन के बाद नवनिर्वाचित पार्षदों एवं बाजार मुहल्ले के व्यापारियों की मोनोपल्ली के आगे इस बाजार का अस्तित्व सिमट चुका है । सरगुजा जिले से बहुतायत मात्रा में  आते रहे सब्जी, टमाटर, मूंगफली, अदरक, लहसुन ,आलू एवं प्याज की आवक जगह के अभाव में पूर्ण रूप से बंद हो चुका है । ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली ताजी सब्जियां का आना बंद हो चुका है । सरगुजा एवं ग्रामीण क्षेत्र से आनी वाली सब्जियां अब दर्री,जमनीपाली में बिक रही है। वर्तमान में बाजार मोहल्ला  जो काफी पुराना है पहले ग्राम पंचायत और नगर पंचायत के हिसाब से पर्याप्त था किंतु वर्तमान में यह स्थल काफी छोटा और सकरा है । यह स्थल चंद व्यापारियों के पसरा से भर जाता है , अब यहां न तो कपड़ा व्यापारियों को जगह मिल पाता न जूता चप्पल, न खिलौने और न ही किसी अन्य चीज बेचने वाले व्यापारियों को जगह मिल पाती । चंद मंडी से खरीदे सब्जी विक्रेताओं से ही बाजार भरा रहता है और लोग यही कोल्ड स्टोरेज की सब्जियां खाने को मजबूर  हैं।

सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि दैनिक और साप्ताहिक बाजार सिमट जाने से सब्जी की बिक्री आधी हो गई है

बाजार के लघु होने का एक महत्वपूर्ण कारण अतिव्यस्त  डिवाइडर युक्त मार्ग का होना है।  चारपहिया  एवं दुपहिया वाहन पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। पुराने बाजार के सरहद के अतिरिक्त बाजार लगाने पर नगरपालिका की कार्यवाही तथा बाहर लगाने वाले व्यापारियों को भगा देना भी यहां के साप्ताहिक बाजार के सिमटने का एक महत्वपूर्ण  कारण है।

कटघोरा की बढ़ती जनसंख्या एवं नगर हित के मद्देनजर दैनिक सब्जी मार्केट एवं साप्ताहिक बाजार के लिए अन्यत्र स्थल चयन की आवश्यकता है।