डीएफओ की अकर्मण्यता के चलते वनमण्डल में अनियमितताओं का अंबार: काम काज में सुस्त और कमीशन खोरी में चुस्त

कटघोरा। कटघोरा वनमण्डल की स्थिति दिनों दिन बिगड़ती जा रही है नियंत्रण हीन होकर रह गया है।पूर्व डीएफओ को एक महिला होने के बावजूद भी आवश्यकता पड़ने पर पहुंचविहीन कार्य क्षेत्र में बाइक से भी दौरा करते देखा गया है लेकिन वर्तमान डीएफओ के पास दो दो वाहन चालक होने के बाद भी कभी कार्य क्षेत्रों का निरीक्षण करते नही देखा गया , परिणाम स्वरूप अनियमितताओं का अंबार सा लग गया है , चाहे वो अवैध कटाई का मामला हो या अन्य निर्माण कार्यों का मामला।2019 में कोसा फल के कारण हजारों पेड़ काट लिए गए लेकिन इनको भनक तक नहीं हुई उस समय ये एसडीओ के पद पर पदस्थ रही हैं आज डीएफओ हैं तो भी कार्य क्षेत्र का दौरा इनके द्वारा कभी करते ना देखा गया और न ही सुना गया । कार्य क्षेत्र में चैतमा रेंज में बन रहे डबल्यू बी एम को ही देख लीजिए किस स्तर का कार्य हो रहा है ।फेंसिंग कार्य का भी यही हाल है बिना देखे लुदी नाला स्टॉप डेम का भुगतान , पाथा तालाब का बिना देखे 24 लाख का भुगतान , कसाईपाली तालाब का 65 लाख का भुगतान ऐसे कई कार्य है जिनका बिना निरीक्षण के भुगतान कर दिया गया । वैसे भी इनके क्षेत्र दौरा करने का कोई औचित्य भी नही है क्योंकि ये ऐसे अधिकारी हैं जिन्हे सिर्फ फिफ्टी ,- फिफ्टी का ज्ञान है , तकनीकी और वानिकी ज्ञान के मामले में इन्हे जीरो कहा जाता है । मुख्यालय से बाहर रहना सप्ताह में दो दिन कार्यालय आना वो भी हाफ टाइम के बाद ये इनकी दिनचर्या है बाबुओं के हिसाब से वनमण्डल का संचालन किया जाता है यही कारण है कि गुणवत्तायुक्त और गुणवत्ताहीन कार्यों में अंतर नही कर पाती। तभी तो इनके एसडीओ कार्यकाल से लेकर जांजगीर चांपा में प्रथम डीएफओ की पदस्थापना तथा वर्तमान में कटघोरा में पदस्थापना तक ये कामकाज में सुस्त और कमीशन खोरी में चुस्त अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बना चुके है । सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। सूचना के अधिकार के अंतर्गत जानकारी मांगने वालों को भी आज तक जानकारी नहीं दी गई है कुछ न कुछ खामियां निकालकर सूचना के अधिकार के पत्र को वापस कर दिया जाता है इसके बावजूद भी वर्तमान में सैकड़ो आरटीआई वनमण्डल कार्यालय में लंबित है।
2018,-19 में स्वीकृत कार्यों में कुछ स्टॉप डेम और तालाब के कार्य आज तक अधूरे पड़े है जिसे पूर्ण कराने के लिए कोई रुचि नहीं लिया जा रहा है संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारियो ने बताया कि 2020-21 और 2021-22 के कई कार्य अधूरे पडे है यदि इन्हें पूरा नहीं कराया गया तो बरसात में क्षति होने की भी संभावना बनी रहेगी और क्षति पहुंचती है तो जो धन राशि उक्त कार्यों के एवज में निकल चुका है वो टोटल अपव्यय के रूप में सामने आएगा । जो ग्रामवासियों के शिकायत का कारण बनता है क्योंकि स्टॉप डेम पूरा न होने से आसपास के खेतों और जमीनों को बरसात का अनियंत्रित बाढ़ नुकसान पहुंचाता है।