भ्रष्टाचार की एक से बढ़कर एक मामला उजागर होने के बाद भी कोई उच्च स्तरीय जांच नही: वनमण्डल कटघोरा

कटघोरा वनमण्डल का मामला : भ्रष्टाचार की एक से बढ़कर एक मामला उजागर होने के बाद भी किसी भी प्रकार की उच्च स्तरीय जांच व कार्यवाही का न होना एक ओर ” सईया भए कोतवाल तो डर काहे का ” वाली कहावत चरितार्थ होते नजर आ रहा है तो वहीं दूसरी ओर विभाग के प्रति जनमानस में ये संदेश जा रहा है कि मानो इस विभाग को उच्च स्तर से भ्रष्टाचार करने की खुली छूट मिली हो । उल्लेखनीय है कि वनविभाग कटघोरा के इतिहास में वानिकी व आर्थिक भ्रष्टाचार तथा अनियमितता एवम वन संरक्षण अधिनियम उल्लंघन के जो मामले उजागर हुए हैं वो कभी नहीं हुए परंतु जांच,कार्यवाही सिफर ही रहा है। विगत दिनों इन्ही के कार्यकाल में मानगुरू जंगल में हजारों पेड़ कटाई का मामला सामने आया ,जांच दल के अध्यक्ष अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री तपेश कुमार झा के 21/10/2019 के स्पष्ट जांच प्रतिवेदन “उपवनमंडलाधिकारी की भी जवाबदारी तय कर प्रकरण के संबंध में नियमानुसार कार्यवाही की जाए,”उसके बाद भी अपनी ऊंची पहुंच के कारण बच निकली और आईएफएस अवॉर्ड देकर जांजगीर चांपा वनमण्डल का डीएफओ बना दिया गया । जिसकी आज विधानसभा में “उस दरम्यान एसडीओ पद पर कटघोरा में नही थी” का लिखित में झूठी जानकारी देने का मामला सुर्खियों में है, फिर भी कार्यवाही कुछ नही ।

*चैतमा रेंज के 9 किमी डबल्यू बी सड़क में जंगल से पत्थर गिट्टी खोदकर ,जेसीबी मशीन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए हरे भरे पेड़ो की बलि चढ़ाकर मुरूम की खोदाई कर प्रोजेक्ट को दरकिनार कर कम मजदूरी देकर यहां तक सोसाइटी के चांवल को 25 रू किलो में देकर काम कराने का मामला उजागर हुआ कार्यवाही जीरो*


रेगुलर मद से कराए गए ए एन आर कार्य के अंतर्गत फेंसिंग कार्य में भारी अनियमितता आरसीसी पोल के स्थान पर 20 रू प्रति नग में जंगल से लकड़ी खंभा कटवाकर बेतरतीब ढंग से गड़ाने का मामला ,ठूठ कटाई और जुताई किए बिना करोड़ों रुपए का फर्जी वहौचार बनाने का मामला प्रकाश में आया जांच या कोई कार्यवाही कुछ नही ।

इसके अतिरिक्त एतमा नगर रेंज में केवल प्लिंथ तक वो भी आधा अधूरा अस्तित्वहीन स्टॉप डेम का नवंबर माह में बिना सत्यापन के भुगतान कर देना , लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से बनी कसानिया तेंदूपत्ता गोदाम में प्रावधानित अनुमानित 9 प्रतिशत विद्युतीकरण कार्य के लिए प्रावधानित 12 लाख के बिजली फिटिंग को अपने किसी रिश्तेदार से 1 लाख रु में कराकर 12 लाख रुपए का बिल प्रस्तुत करने का मामला भी उजागर हुआ है हालाकि उजागर होने के बाद भुगतान को समिति वालो ने रोक लगा दिया है ।
पाथा नया तालाब कक्ष क्रमांक 528 में काम हुआ 30 प्रतिशत एसडीओ सत्यापन कर पंचनामा बनाया जिसके अनुसार काम हुआ 50 प्रतिशत और भुगतान जनवरी माह में 80 प्रतिशत कर देने का भी मामला उजागर हुआ परंतु कार्यवाही नगण्य रहा ।

जटगा रेंज के सैकड़ों आदिवासी धनुहार , पंडो जाति के मजदूरों की 4,- 4 महीने की लगभग 50 लाख रु की मजदूरी 12 महीने तक नहीं किया जाना जिसकी जानकारी कई बार उच्चाधिकारियों को भी लिखित में दी जा चुकी है तथा 2018-19 के तालाब एवम स्टॉप डेम के कार्यों की कई स्तर पर जांच होने के बाद भी कमीशन के कारण भुगतान न करना उल्टा उच्च विभाग को कोई भी मजदूरी भुगतान बकाया नही है , की झूठी जानकारी देने जैसे कई गंभीर मामलों का पर्दाफाश हो चुका है । समाधान या भुगतान करने के बजाय हर बार उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन तथा जांच कराने के बाद ही भुगतान किए जाने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आना इस डीएफओ की कार्यशैली को संदेहास्पद बनाती है । वनविभाग के ऐसे अधिकारियों की भ्रष्ट गतिविधियों से लगातार विभाग की छवि धूमिल होती जा रही है और सत्ता पक्ष के बड़े नेता का हवाला देकर कि कोई मुझे मेरी मर्जी के बिना हटा नही सकता जैसे अनर्गल बयानबाजी तथा सच्चाई को दबाने की कुत्सित प्रयास में सच लिखने और दिखाने वाले मीडिया वालो को मानहानि की नोटिस देने की धमकी देकर शासन को भी बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा है ।
उच्चाधिकारी समय रहते इस दिशा में गंभीरता से ध्यान नहीं दिया तो विभाग को सैकड़ों आदिवासी मजदूरों के उग्र आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है।
