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छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग की बड़ी प्रशासनिक पहल : 10,463 स्कूलों के युक्तियुक्तकरण का आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ी प्रशासनिक पहल करते हुए राज्य के 10,463 स्कूलों के युक्तियुक्तकरण का आदेश जारी किया है। विभाग ने जिलों से प्राप्त प्रस्तावों और लोक शिक्षण संचालनालय की अनुशंसा के आधार पर यह निर्णय लिया है, जिसमें ई-संवर्ग के 5,849 और टी-संवर्ग के 4,614 स्कूल शामिल हैं। आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। युक्तियुक्तकरण का मुख्य उद्देश्य एक ही परिसर में संचालित स्कूलों को एकीकृत कर बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करना है। इसके तहत कई छोटे या पास-पास स्थित स्कूलों को आपस में मर्ज किया गया है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
हालांकि इस प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों द्वारा विभिन्न स्तरों पर विरोध भी दर्ज कराया गया था। कई शिक्षकों को विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर स्थानांतरित किया गया, जिससे उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यह मामला न्यायालय तक भी पहुंचा, जहां इस पर सुनवाई हुई। इसके बावजूद शासन ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए युक्तियुक्तकरण को लागू कर दिया। अब इस प्रक्रिया को लागू हुए लगभग एक वर्ष पूरा होने जा रहा है, लेकिन इससे जुड़े कई व्यावहारिक मुद्दे सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या अनुदान राशि को लेकर सामने आई है। जिन स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया है, उन्हें सत्र 2025-2026 में अपेक्षित अनुदान राशि जारी नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार, जिन स्कूलों को आपस में मर्ज किया गया है, वहां दोनों स्कूलों के छात्रों की संख्या के आधार पर अनुदान जारी होना चाहिए था। लेकिन वास्तविकता में केवल एक स्कूल की पूर्व दर्ज संख्या के आधार पर ही राशि जारी की गई है। इससे स्कूलों को मिलने वाली कुल राशि कम हो गई है, जबकि छात्रों की संख्या बढ़ चुकी है। इसका सीधा असर स्कूलों के संचालन और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में संसाधनों की कमी की स्थिति बन गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। दूसरी बड़ी समस्या यू-डाइस (UDISE) पोर्टल से जुड़ी है। युक्तियुक्तकरण के बाद स्कूलों का यू-डाइस नंबर मर्ज किया जाना था, ताकि छात्रों की कुल संख्या एकीकृत रूप से दर्ज हो सके। लेकिन एक साल बीतने के बावजूद यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। वर्तमान में मर्ज किए गए स्कूलों के अलग-अलग यू-डाइस नंबर अब भी सक्रिय हैं। जिससे दोनों स्कूलों की छात्र संख्या अलग-अलग दिखाई दे रही है। इससे न केवल आंकड़ों में भ्रम की स्थिति बन रही है, बल्कि अनुदान वितरण और योजना निर्माण में भी दिक्कतें आ रही हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यू-डाइस मर्जिंग की प्रक्रिया तकनीकी स्तर पर चल रही है और इसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं स्कूल प्रबंधन और शिक्षक इस प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग कर रहे हैं, ताकि छात्रों और स्कूलों को होने वाली परेशानियों को दूर किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि युक्तियुक्तकरण एक आवश्यक कदम है, लेकिन इसके साथ जुड़ी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना भी उतना ही जरूरी है। यदि आंकड़ों और अनुदान से जुड़ी समस्याएं दूर नहीं की गईं, तो इसका असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग की इस पहल से राज्य में शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आ रही समस्याओं के समाधान की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है।