Googly News Korba

276 x 101 copy
Big Breaking News
कटघोरा

कटघोरा के साप्ताहिक बाजार को अन्यत्र लगाए जाने की मांग को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज :गोंडवाना विधायक ने लिया आड़े हाथ

कटघोरा ( गूगली न्यूज  )। कटघोरा के प्रत्येक  रविवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार  को लेकर  राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती नजर आ रही  है।  अंचल के आदिवासी सब्जी विक्रेताओं के द्वारा कटघोरा बाजार में उनके साथ हो रहे भेदभाव और दुर्व्यवहार को लेकर  घोर आपत्ति जताया गया है और इस आशय का एक पत्र क्षेत्रीय विधायक को लिखकर विरोध प्रकट किया  गया है। क्षेत्रीय विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम द्वारा अपने लेटरपेड में ग्रामीणों की उक्त मांग को उठाते हुए नगरपालिका परिषद कटघोरा के CMO और SDM कटघोरा को शीघ्र निराकरण हेतु लिखा गया है।

दूसरी ओर साप्ताहिक बाजार को लेकर लगातार शिकायत, विरोध होने के बावजूद भी नगरपालिका परिषद के कानों में जूं तक नहीं रेंगना आश्चर्यजनक है। कभी स्थानीय सब्जी विक्रेता का विरोध ,तो कभी ट्रैफिक का तो कभी बाहरी व्यापारियों द्वारा उचित स्थान नहीं मिलने पर कड़ा विरोध किया जाता रहा है । बाजार के सिमट जाने से एक ओर जहां स्थानीय सब्जी विक्रेताओं की नाराजगी झेलना पड़ रहा है ।

साप्ताहिक बाजार का अस्तित्व खतरे में ,अन्यत्र लगाए जाने की मांग को लेकर मैदान में  उतरने को तैयार गोंडवाना विधायक

गौरतलब हो कि कटघोरा नगर पर आश्रित ग्रामीण अंचल के आदिवासी किसानों का यह साप्ताहिक बाजार उनके कृषि व सब्जी उत्पाद खपाने का प्रमुख बाजार रहा है।   ग्रामीणों की प्रमुख शिकायत यह भी रहा है कि सैकड़ों आदिवासी परिवार का जीविकोपार्जन हर रोज कृषि उत्पाद व सब्जियां खपाकर चलता हैं  परन्तु कटघोरा बाजार में भेदभाव होने से किसानों को अपना सामान बेचने के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता जिससे कुछ महीनों से बिचौलियों को काफी कम दाम में सब्जी बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीण अंचल के सब्जी विक्रेताओं को  बैठने की जगह कटघोरा में न तो दैनिक बाजार में मिल पाता और नहीं साप्ताहिक बाजार में । इधर उधर बैठने पर दुर्व्यवहार करके भगा दिया जाता है। पुराने बाजार में जो शेडयुक्त है उसमें पूर्व से सब्जी विक्रेता कब्जा जमा के बैठे हैं और दूसरी ओर यह जगह इतना छोटा है कि 50- 60 दुकानदारों से भर जाता है। वर्तमान समय से पूर्व  कटघोरा साप्ताहिक बाजार में हजारों  चलित दुकानदार विभिन्न समान लेकर आते थे और खरीददारों की संख्या 5000 से 10000 के आसपास होता था । नगरीय प्रशासन की हठधर्मिता  और कुछ प्रभावशाली नेताओं की दखलंदाजी से  ये विशाल साप्ताहिक बाजार सिमट कर रह गया है जिससे कटघोरा वासी ताजी सब्जियों के लिए तरस रही है वहीं देहाती सब्जी विक्रेताओं को उनकी सब्जियों का सही दाम नहीं मिल पाने से किसान जिनका जीवन सब्जियों पर निर्भर है काफी परेशान हैं ।

कटघोरा का विशाल सब्जी मार्केट जगह के अभाव में अपना अस्तित्व खोते जा रहा है

कटघोरा  का साप्ताहिक बाजार नगर एवं आसपास के क्षेत्र के लिए सबसे बड़े बाजार के रूप में उभर कर आया था। बाजार मुहल्ले से लेकर गायत्री धर्मशाला तक और इधर शहीद वीरनारायण चौक तक लगभग 500 मीटर तक फैला रहता था।  सरगुजा, कोरिया एवं बिलासपुर जिले तक के व्यापारी सब्जी एवं अन्य खाद्य पदार्थ, खिलौने ,कपड़े बेचने आते थे।कटघोरा का साप्ताहिक बाजार जिले का सबसे बड़ा साप्ताहिक बाजार के रूप में स्थापित हो चुका था। नए नगरपालिका गठन के बाद नवनिर्वाचित पार्षदों एवं बाजार मुहल्ले के व्यापारियों की मोनोपल्ली के आगे इस बाजार का अस्तित्व सिमटते जा रहा है । सरगुजा जिले से बहुतायत मात्रा में  आते रहे सब्जी, टमाटर, मूंगफली, अदरक, लहसुन ,आलू एवं प्याज की आवक जगह के अभाव में पूर्ण रूप से बंद हो चुका है । ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली ताजी सब्जियां का आना बंद हो चुका है । सरगुजा एवं ग्रामीण क्षेत्र से आनी वाली सब्जियां अब दर्री,जमनीपाली में बिक रही है। वर्तमान में बाजार मोहल्ला  जो काफी पुराना है पहले ग्राम पंचायत और नगर पंचायत के हिसाब से पर्याप्त था किंतु वर्तमान में यह स्थल काफी छोटा और सकरा है । यह स्थल चंद व्यापारियों के पसरा से भर जाता है , अब यहां न तो कपड़ा व्यापारियों को जगह मिल पाता न जूता चप्पल, न खिलौने और न ही किसी अन्य चीज बेचने वाले व्यापारियों को जगह मिल पाती । चंद मंडी से खरीदे सब्जी विक्रेताओं से ही बाजार भरा रहता है।  गोंडवाना विधायक तुलेश्वर हीरासिंह मरकाम ने आदिवासी ग्रामीणों की उक्त मांगों को आड़े हाथ लेते हुए त्वरित निराकरण चाहा है तथा कटघोरा की बढ़ती जनसंख्या एवं नगर हित के मद्देनजर दैनिक सब्जी मार्केट एवं साप्ताहिक बाजार के लिए अन्यत्र स्थल चयन की आवश्यकता पर जोर डालते हुए पत्र लिखा गया है।