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बिलासपुर

सिम्स के पैथोलॉजी डिपार्टमेंट में अव्यवस्था का आलम ,लेब टेक्नीशियन के भरोसे चल रहा लेब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट मेडिकल साइंस( सिम्स) के पैथोलॉजी लेब की हालत बद से बदतर हो चली है । बता दें कि सिम्स का यह लेब  एक मात्र ऐसा लेब है  जहां से प्रतिदिन 400 से 500 ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट निकलती है ।  सिम्स के इस पैथोलॉजी डिपार्टमेंट में अव्यवस्था का आलम तो यहां तक पहुंच गया है कि इतने बड़े लेब में  कोई भी पैथोलॉजिस्ट  उपलब्ध नहीं रहता, सेंट्रल लैब पूरी तरह से लैब टेक्नीशियन के भरोसे चल रहा  है ।  जानकारों ने बताया कि सेंट्रल लैब में सुबह की ड्यूटी में पीजी स्टूडेंट आकर  रिपोर्टिंग पेपर में सिग्नेचर करके चले जाते हैं। यहां पर यह भी देखा गया है कि एडवांस में रिपोर्टिंग पेपर में  पैथोलॉजिस्ट का साइन होना चाहिए वहां साइन किया हुआ पेपर रखा रहता है।  रात्रि में भी पैथोलॉजी के  सेंट्रल लैब में केवल एक लेब टेक्नीशियन उपस्थित रहता हैं।  छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में हजारों मरीज  रोज आते है पर चिकित्सा के नाम पर उनके साथ धोखा हो रहा है बिना पैथोलॉजिस्ट के देखे रिपोर्ट मरीज को दे दी जाती है । जो मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है।  रात्रि में एक टेक्नीशियन के भरोसे पूरा सेंट्रल लैब चलाया जा रहा है वो रात्रि में 90 से 100 सीबीसी और 90 से 100 ब्लड ग्रुप मलेरिया  ब्लीडिंग, टाइम क्लोटिंग टाइम ये सभी जांच होती है और बिना किसी सिग्नेचर ऑथोरिटी के मरीजों को दे दी जाती हैं।

           गौरतलब हो कि शासकीय आंकड़ों के अनुसार एक ओर बिलासपुर का यह सिम्स अस्पताल गरीबों के लिए वरदान से कम नहीं है जहां आसपास के गांव से लेकर जिलों के लोग भी अपना इलाज कराने आते है और उन्हें निःशुल्क बेहतर इलाज की सुविधा देकर यह अस्पताल छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट मेडिकल ऑफ साइंस छत्तीसगढ़ में अपना एक पहचान बना चुका है।परन्तु हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है जो जांच का विषय है।