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कोरबा न्यूज़

ब्रांडेड चाय की बढ़ती लोकप्रियता पर उठे सवाल
जिले में अलग-अलग नामों से बिक रही चाय की हो जांच, आखिर स्वाद और लोकप्रियता का राज क्या?

कोरबा। जिले में इन दिनों अलग-अलग नामों और ब्रांड के साथ चाय बेचने वाली दुकानों की संख्या तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। खास बात यह है कि कई दुकानों पर ग्राहकों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है। चाय के स्वाद और बढ़ती लोकप्रियता को लेकर अब उपभोक्ताओं के बीच तरह-तरह के सवाल भी उठने लगे हैं। सवाल यह है कि इन चायों की खासियत आखिर क्या है और इनके स्वाद को इतना पसंद किए जाने के पीछे कौन-सी सामग्री या प्रक्रिया जिम्मेदार है?
हालांकि, केवल किसी चाय की लोकप्रियता अथवा बार-बार सेवन की इच्छा के आधार पर उसमें किसी नशीले या लत लगाने वाले पदार्थ की मौजूदगी मान लेना उचित नहीं है। सामान्य चाय में प्राकृतिक रूप से कैफीन सहित कई घटक मौजूद होते हैं, जिनके सेवन से व्यक्ति को ताजगी और जागरूकता का अनुभव हो सकता है।


संदेह है तो वैज्ञानिक जांच जरूरी


यदि किसी विशेष चाय के स्वाद, खुशबू, रंग अथवा सेवन के बाद बार-बार पीने की इच्छा को लेकर उपभोक्ताओं के मन में संदेह है, तो इसका समाधान केवल वैज्ञानिक जांच से ही संभव है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा विभिन्न दुकानों से चाय के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराई जा सकती है।
जांच के दौरान चायपत्ती की गुणवत्ता, इस्तेमाल किए जा रहे फ्लेवर, रंग, मसाले, मिठास देने वाले पदार्थ तथा अन्य सामग्री की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूपता की पड़ताल की जा सकती है। यदि कहीं कोई गैर-अनुमत अथवा मानक से विपरीत सामग्री पाई जाती है, तो जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता भी स्पष्ट हो सकता है।


गुड़, मसाला और फ्लेवर वाली चाय भी जांच के दायरे में आए


कोरबा ,कटघोरा सहित आसपास के क्षेत्रों में सामान्य चाय के

अलावा गुड़ वाली चाय, मसाला चाय और विभिन्न फ्लेवर वाली चाय का चलन भी बढ़ रहा है। ऐसे में केवल चायपत्ती ही नहीं, बल्कि उसमें इस्तेमाल होने वाले मसाले, दूध, गुड़, चीनी, फ्लेवर और अन्य सामग्री की गुणवत्ता पर भी नजर रखना जरूरी है।


बिना जांच आरोप नहीं, लेकिन सवालों की अनदेखी भी क्यों?


किसी भी ब्रांड या दुकानदार पर बिना प्रमाण मिलावट अथवा नशीला पदार्थ मिलाने का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि उपभोक्ताओं के बीच किसी उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो संबंधित विभाग द्वारा नमूने लेकर जांच कराने में कोई हर्ज नहीं है।
आखिर इन चायों की लोकप्रियता का आधार केवल स्वाद और गुणवत्ता है या इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी इसमें कोई भूमिका निभाती है?
इन सवालों का वास्तविक जवाब प्रयोगशाला जांच और अधिकृत रिपोर्ट से ही सामने आ सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं के हित में खाद्य सुरक्षा विभाग से जिले में लोकप्रिय हो रही विभिन्न ब्रांडेड एवं विशेष प्रकार की चाय के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कराने की मांग उठ रही है।